If you are a millennial, then the odds are in favour of you having watched the famous TV serial “Office Office”. In that serial, there was a famous character called Mussadilal portrayed by Pankaj Kapoor. I loved the nuanced, typical and humourous manner in which the conduct of officials in the office, work culture and the aggrieved citizen represented by Mussadilal was shown. Many serials are not a work of pure fiction, and at times they show some reality of society on ground, at least in bits and pieces. So, presenting an example of Mussadilal’s famous catchphrase aka takiya-kalam “तो दो बातें होंगी”:
अगर आप भारत देश में पैदा हुए, तो दो बातें होंगी। या तो आप BPL (Below Poverty Line) में पैदा होंगे या APL (Above Poverty Line)।
अगर APL में पैदा हुए, तो आप कभी राशन की दुकान नहीं जायेंगे। पर अगर आप BPL में पैदा हो गए, तो दो बातें होंगी।
राशन की दुकान पर 1 किलो अनाज की जगह सिर्फ 900 ग्राम दिया जा रहा है, तो अगर आप चुपचाप जितना मिल रहा है उतना लेके घर चले जाएंगे, तो कोई बात नहीं। पर अगर आपने आवाज़ उठाई, तो दो बातें होंगी।
अगर आपमें दम है और आप अलग से जाके राशन वाले से बात कर लेते हैं, तो आपको आपका पूरा हक यानी 1 किलो मिल सकता है। पर अगर आपने ज़्यादा आवाज़ उठाई, तो दो बातें होंगी।
अगर आप जूते खाकर बिना कुछ लिए घर निकल लिए, तो कोई बात नहीं। पर अगर जूते खाकर भी नहीं निकले, तो दो बातें होंगी।
आपको उपद्रव फैलाने के आरोप में पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा, फिर या तो आप कुछ महीने अंदर रहकर झेल सकते हो तो झेल लो बाहर तो आ ही जाओगे कभी न कभी। पर अगर आपने ले देकर बेल करवाई, तो इस बार दो बातें नहीं होंगी।
क्योंकि आप गधे कहलाए जाओगे, क्योंकि इतने में तो आप अनाज बिना राशन की दुकान जाए ही बाजार से खरीद लेते। इसलिए हेंस प्रूव्ड, कि अगर आप “समझदार” हो तो आप शुरू में ही 900 ग्राम लेकर चलता बनोगे।

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